हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.65.10

मंडल 8 → सूक्त 65 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
उ॒त्तिष्ठ॒न्नोज॑सा स॒ह पी॒त्वी शिप्रे॑ अवेपयः । सोम॑मिन्द्र च॒मू सु॒तम् ॥ (१०)
हे इंद्र! तुम पात्र में भरे सोमरस को पीकर शक्ति के साथ बड़े होओ एवं अपने जबड़ों को कंपाओ. (१०)
O Indra! You grow up with power by drinking the somras filled in the pot and shiver your jaws. (10)