हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.65.12

मंडल 8 → सूक्त 65 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
वाच॑म॒ष्टाप॑दीम॒हं नव॑स्रक्तिमृत॒स्पृश॑म् । इन्द्रा॒त्परि॑ त॒न्वं॑ ममे ॥ (१२)
मैं इद्र की स्तुति करता हूं तथा आठ एवं नौ दिशाओं में यज्ञ स्पर्श करने वाली स्तुति को भी इंद्र से कम समझता हूं. (१२)
I praise Idra and consider the praise that touches the yagna in eight and nine directions less than Indra. (12)