हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.65.7

मंडल 8 → सूक्त 65 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
म॒रुत्वा॑ँ इन्द्र मीढ्वः॒ पिबा॒ सोमं॑ शतक्रतो । अ॒स्मिन्य॒ज्ञे पु॑रुष्टुत ॥ (७)
हे फलदायक, शतक्रतु, मरुतों से युक्त एवं बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! तुम इस यज्ञ में आकर सोमरस पिओ. (७)
O fruitful, Sathirattu, Indra, possessed of the maruts and called by many! You come to this yagna and drink somras. (7)