हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.67.3

मंडल 8 → सूक्त 67 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 67
उ॒त नः॑ कर्ण॒शोभ॑ना पु॒रूणि॑ धृष्ण॒वा भ॑र । त्वं हि श‍ृ॑ण्वि॒षे व॑सो ॥ (३)
हे शत्रुओं को नष्ट करने वाले एवं निवासस्थान देने वाले इंद्र! हमने तुम्हारा यश सुना है. बुम हमें बहुत से कान के गहने दो. (३)
O Indra, who destroys the enemies and gives them abodes! We have heard your praise. Bum give us lots of ear jewelry. (3)