हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.69.7

मंडल 8 → सूक्त 69 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 69
इन्द्र॒ दृह्य॑स्व॒ पूर॑सि भ॒द्रा त॑ एति निष्कृ॒तम् । इ॒यं धीरृ॒त्विया॑वती ॥ (७)
हे इंद्र! तुम दृढ़ बनो. तुम अभिलाषा पूरी करने वाले हो. यज्ञ संपादन करने वाली कल्याणकारिणी स्तुति तुम्हें प्राप्त होती है. (७)
O Indra! You be firm. You are about to fulfill the desire. You get the welfare praise that performs the yajna. (7)