ऋग्वेद (मंडल 8)
स॒द्यो॒जुव॑स्ते॒ वाजा॑ अ॒स्मभ्यं॑ वि॒श्वश्च॑न्द्राः । वशै॑श्च म॒क्षू ज॑रन्ते ॥ (९)
हे इंद्र! सबको प्रसन्न करने वाले तुम्हारे अन्न हमारे पास शीघ्र आवें. हमारे स्तोता अनेक अभिलाषाओं से युक्त होकर शीघ्र तुम्हारी स्तुति करें. (९)
O Indra! May your food that pleases all come to us soon. May our hymns be filled with many desires and praise you quickly. (9)