हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.71.4

मंडल 8 → सूक्त 71 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 71
आ त्व॑शत्र॒वा ग॑हि॒ न्यु१॒॑क्थानि॑ च हूयसे । उ॒प॒मे रो॑च॒ने दि॒वः ॥ (४)
हे शत्रुरहित इंद्र! शीघ्र आओ. स्तोता उवथ मंत्रं द्वारा तुम्हें द्युलोक के देवों से दीप्त यज्ञ में बुलाते हैं. (४)
O enemyless Indra! Come quickly. The Stotas call you to the deep yajna from the gods of Douloka through uwatha mantras. (4)