हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.76.1

मंडल 8 → सूक्त 76 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 76
द्यु॒म्नी वां॒ स्तोमो॑ अश्विना॒ क्रिवि॒र्न सेक॒ आ ग॑तम् । मध्वः॑ सु॒तस्य॒ स दि॒वि प्रि॒यो न॑रा पा॒तं गौ॒रावि॒वेरि॑णे ॥ (१)
हे अश्विनीकुमारो! द्युम्नीक तुम्हारा स्तोता है. वर्षा ऋतु में जिस प्रकार कुएं का पानी पास आ जाता है, उसी प्रकार तुम आओ. हे नेताओ! यह स्तोता दीप्तिशाली यज्ञ में नशीले सोमरस को प्रिय समझता है. गौर मृग जिस प्रकार तालाब में पानी पीता है, उसी प्रकार तुम सोमरस पिओ. (१)
O Ashwinikumaro! Dumnik is your hymn. In the rainy season, just as the water of the well comes near, so come you. Hey leaders! This hymn is dear to the intoxicating somras in the radiant yajna. Just as the gaur deer drinks water in the pond, you drink somers. (1)