हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.78.2

मंडल 8 → सूक्त 78 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 78
अपा॑धमद॒भिश॑स्तीरशस्ति॒हाथेन्द्रो॑ द्यु॒म्न्याभ॑वत् । दे॒वास्त॑ इन्द्र स॒ख्याय॑ येमिरे॒ बृह॑द्भानो॒ मरु॑द्गण ॥ (२)
स्तोत्र न करने वाले लोगों को मारने वाले इंद्र ने शत्रुओं द्वारा होने वाली हिंसा दूर की. इसके पश्चात्‌ इंद्र यशस्वी बने. हे विशाल दीप्तियुक्त एवं मरुतों सहित इंद्र! सभी देवों ने तुम्हें अपनी मित्रता के लिए पाया. (२)
Indra, who killed those who did not eat hymns, removed the violence caused by the enemies, after which Indra became successful. O Indra with great radiance and maruts! All the gods found you for their friendship. (2)