हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.81.16

मंडल 8 → सूक्त 81 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 81
यस्ते॑ नू॒नं श॑तक्रत॒विन्द्र॑ द्यु॒म्नित॑मो॒ मदः॑ । तेन॑ नू॒नं मदे॑ मदेः ॥ (१६)
हे सौ यज्ञों वाले इंद्र! प्राचीनकाल में हमने तुम्हारे लिए जो सर्वाधिक यज्ञ वाला सोमरस निचोड़ा था, उसके द्वारा प्रमुदित होकर एवं धन देकर हमें प्रसन्न बनाओ. (१६)
O Indra of a hundred yagnas! Please us by being merried and given money by the most sacrificial somras that we squeezed for you in ancient times. (16)