ऋग्वेद (मंडल 8)
मो षु ब्र॒ह्मेव॑ तन्द्र॒युर्भुवो॑ वाजानां पते । मत्स्वा॑ सु॒तस्य॒ गोम॑तः ॥ (३०)
हे अन्नों के स्वामी इंद्र! तुम स्तोता के समान आलसी मत बनना. तुम गोदुग्ध मिला हुआ सोमरस पीकर प्रसन्न बनो. (३०)
O Indra, lord of the grains! Don't you become as lazy as The Stota. Be happy to drink the mixed somers. (30)