हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.81.30

मंडल 8 → सूक्त 81 → श्लोक 30 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 81
मो षु ब्र॒ह्मेव॑ तन्द्र॒युर्भुवो॑ वाजानां पते । मत्स्वा॑ सु॒तस्य॒ गोम॑तः ॥ (३०)
हे अन्नों के स्वामी इंद्र! तुम स्तोता के समान आलसी मत बनना. तुम गोदुग्ध मिला हुआ सोमरस पीकर प्रसन्न बनो. (३०)
O Indra, lord of the grains! Don't you become as lazy as The Stota. Be happy to drink the mixed somers. (30)