हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.86.3

मंडल 8 → सूक्त 86 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 86
य इ॑न्द्र॒ सस्त्य॑व्र॒तो॑ऽनु॒ष्वाप॒मदे॑वयुः । स्वैः ष एवै॑र्मुमुर॒त्पोष्यं॑ र॒यिं स॑नु॒तर्धे॑हि॒ तं ततः॑ ॥ (३)
हे इंद्र! देवों की अभिलाषा न करने वाला एवं यज्ञरहित जो व्यक्ति स्वप्न देखने के लिए सोता है, वह अपनी गतियों द्वारा ही अपने पोषण योग्य धन का नाश करे. तुम उसे कर्मरहित प्रदेश में भेजो. (३)
O Indra! A person who does not desire the gods and who sleeps to dream, let him destroy his nourishing wealth through his own movements. You send him to the land without work. (3)