हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.89.4

मंडल 8 → सूक्त 89 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 89
अ॒यम॑स्मि जरितः॒ पश्य॑ मे॒ह विश्वा॑ जा॒तान्य॒भ्य॑स्मि म॒ह्ना । ऋ॒तस्य॑ मा प्र॒दिशो॑ वर्धयन्त्यादर्दि॒रो भुव॑ना दर्दरीमि ॥ (४)
इंद्र नेम के पास जाकर बोले-“हे स्तुति करने वाले नेम! मैं यहां हूं. यहां खड़े हुए मुझको देखो. मैं अपनी महिमा से संसार के सभी प्राणियों को पराजित करता हूं. यज्ञ का उपदेश करने वाले विद्वान्‌ मुझे स्तुतियों द्वारा बढ़ाते हैं. विदीर्ण करने की आदत वाला मैं सब लोगों को विदीर्ण करता हूं.” (४)
Indra went to the name and said, "O name of praise! I'm here. Look at me standing here. I defeat all beings of the world by My glory. The scholars who preach the yajna magnify me with praises. I am afraid of all the people in the habit of piercing." (4)