हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.91.14

मंडल 8 → सूक्त 91 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 91
यस्य॑ त्रि॒धात्ववृ॑तं ब॒र्हिस्त॒स्थावसं॑दिनम् । आप॑श्चि॒न्नि द॑धा प॒दम् ॥ (१४)
अग्नि के तीन कुश बंधनहीन एवं बिना ढके हैं. अग्नि में जल की भी स्थिति है. (१४)
The three kushas of agni are unbonded and unshackled. There is also a state of water in the agni. (14)