हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.92.5

मंडल 8 → सूक्त 92 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 92
स दृ॒ळ्हे चि॑द॒भि तृ॑णत्ति॒ वाज॒मर्व॑ता॒ स ध॑त्ते॒ अक्षि॑ति॒ श्रवः॑ । त्वे दे॑व॒त्रा सदा॑ पुरूवसो॒ विश्वा॑ वा॒मानि॑ धीमहि ॥ (५)
हे विशाल धन वाले अग्नि! जो यजमान तुम्हें हव्य देता है, वह शत्रु की दृढ़ नगरी में भी स्थित अन्न को अपने घोड़ों द्वारा नष्ट करता है तथा क्षीण न होने वाला अन्न धारण करता है. हम भी तुम में स्थित सभी उत्तम धनों को प्राप्त करेंगे. (५)
O agni with huge wealth! The host who gives you the havya destroys the food also in the fortified city of the enemy by his horses and holds the unstainable food. We will also receive all the best wealth located in you. (5)