हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.92.7

मंडल 8 → सूक्त 92 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 92
अश्वं॒ न गी॒र्भी र॒थ्यं॑ सु॒दान॑वो मर्मृ॒ज्यन्ते॑ देव॒यवः॑ । उ॒भे तो॒के तन॑ये दस्म विश्पते॒ पर्षि॒ राधो॑ म॒घोना॑म् ॥ (७)
हे दर्शनीय एवं प्रजाओं के पालक अग्नि! शोभनदान वाले एवं देवों की अभिलाषा करने वाले यजमान स्तुतियों द्वारा उसी प्रकार तुम्हारी सेवा करते हैं, जिस प्रकार रथ खींचने वाले घोड़े की सेवा की जाती है. तुम यजमानों के पुत्रों और पौत्रों को धन वालों का धन दो. (७)
O agni, the guardian of the people and the seer of the people! Hosts who are adorned and wish for the gods serve you by praise, just as the horse that pulls the chariot is served. Give the sons and grandsons of the hosts the wealth of those who have wealth. (7)