हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.100.6

मंडल 9 → सूक्त 100 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 100
पव॑स्व वाज॒सात॑मः प॒वित्रे॒ धार॑या सु॒तः । इन्द्रा॑य सोम॒ विष्ण॑वे दे॒वेभ्यो॒ मधु॑मत्तमः ॥ (६)
हे अतिशय अन्नदाता एवं निचुड़े हुए सोम! तुम धारा के रूप में नीचे गिरो एवं इंद्र, विष्णु आदि देवों के लिए मधुरतम बनो. (६)
O very annadata and a deserted Mon! You fall down as stream and become the sweetest to the gods like Indra, Vishnu etc. (6)