हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.101.14

मंडल 9 → सूक्त 101 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 101
आ जा॒मिरत्के॑ अव्यत भु॒जे न पु॒त्र ओ॒ण्योः॑ । सर॑ज्जा॒रो न योष॑णां व॒रो न योनि॑मा॒सद॑म् ॥ (१४)
देवों के मित्र सोम दशापवित्र से इस प्रकार मिल जाते हैं, जिस प्रकार रक्षक माता-पिता की भुजाओं में पुत्र आ जाता है. जार पुरुष जिस प्रकार स्त्री को पाने के लिए दौड़ता है, उसी प्रकार सोम द्रोणकलश की ओर जाते है. (१४)
The friends of the gods meet the Som Dashapavittra in such a way that the son comes into the arms of the protector's parents. Just as the jar man runs to get the woman, so so som goes towards Dronakalash. (14)