हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.101.3

मंडल 9 → सूक्त 101 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 101
तं दु॒रोष॑म॒भी नरः॒ सोमं॑ वि॒श्वाच्या॑ धि॒या । य॒ज्ञं हि॑न्व॒न्त्यद्रि॑भिः ॥ (३)
ऋत्विज्‌ लोग इस अहिंसनीय एवं यज्ञयोग्य सोम को समस्त अभिलाषाओं से पूर्ण बुद्धि के सहारे पत्थरों की सहायता से निचोड़ते हैं. (३)
The ritwija people squeeze this non-violent and sacrificial monstrosity with the help of stones with the help of full intellect from all desires. (3)