ऋग्वेद (मंडल 9)
अ॒स्य व्र॒ते स॒जोष॑सो॒ विश्वे॑ दे॒वासो॑ अ॒द्रुहः॑ । स्पा॒र्हा भ॑वन्ति॒ रन्त॑यो जु॒षन्त॒ यत् ॥ (५)
सब देव शत्रुरहित होकर सोम के यज्ञ में मिलते हैं एवं अभिलाषा के योग्य बनते हैं. रमणशील देव सोम का सेवन करते हैं. (५)
All the gods meet in the yagna of Soma without enemies and become worthy of desire. Ramansheel dev consumes Som. (5)