हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.102.8

मंडल 9 → सूक्त 102 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 102
क्रत्वा॑ शु॒क्रेभि॑र॒क्षभि॑रृ॒णोरप॑ व्र॒जं दि॒वः । हि॒न्वन्नृ॒तस्य॒ दीधि॑तिं॒ प्राध्व॒रे ॥ (८)
हे सोम! तुम अपने ज्ञान व दीप्तिवाली इंद्रियों के द्वारा अंतरिक्ष का अंधकार नष्ट करो एवं हिंसारहित यज्ञ में धारक रस को प्रेरित करो. (८)
Hey Mon! You destroy the darkness of space through your senses of knowledge and glistening and inspire the bearer juice in the violence-free yagna. (8)