ऋग्वेद (मंडल 9)
अ॒यं भरा॑य सान॒सिरिन्द्रा॑य पवते सु॒तः । सोमो॒ जैत्र॑स्य चेतति॒ यथा॑ वि॒दे ॥ (२)
संग्राम के लिए सहारा लेने योग्य एवं निचुड़े हुए सोम इंद्र के लिए पात्रों में टपकते हैं. जैसे इंद्र सारे ससांर को जानते हैं, वैसे ही सोम जयशील इंद्र को जानते हैं. (२)
Squeezed Soma drips into the vessels for Indra to prepare for battle. Just as Indra knows the whole world, similarly victorious Soma knows Indra. (2)