ऋग्वेद (मंडल 9)
मृ॒ज्यमा॑नः सुहस्त्य समु॒द्रे वाच॑मिन्वसि । र॒यिं पि॒शङ्गं॑ बहु॒लं पु॑रु॒स्पृहं॒ पव॑माना॒भ्य॑र्षसि ॥ (२१)
हे शोभन उंगलियों वाले एवं मसले जाते हुए सोम! तुम अंतरिक्ष में अपना शब्द भेजते हो. हे पवमान सोम! तुम स्तोताओं को पीले रंग का, अधिक एवं बहुतों द्वारा चाहने योग्य धन देते हो. (२१)
O Shobhan with fingers and going to the point mon! You send your word into space. O Pawman Mon! You give the psalms yellow, more and more money than many want. (21)