हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.107.3

मंडल 9 → सूक्त 107 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 107
परि॑ सुवा॒नश्चक्ष॑से देव॒माद॑नः॒ क्रतु॒रिन्दु॑र्विचक्ष॒णः ॥ (३)
देवों को मस्त करने वाले, यज्ञकर्ता, दीप्तिशाली एवं विशेषदृष्टि वाले सोम निचुड़ते हुए सबके दर्शन के लिए टपकते हैं. (३)
The somas who have made gods happy, the yajnakarta, the bright and the special-eyed, droop to see everyone. (3)