हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.108.10

मंडल 9 → सूक्त 108 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 108
आ व॑च्यस्व सुदक्ष च॒म्वोः॑ सु॒तो वि॒शां वह्नि॒र्न वि॒श्पतिः॑ । वृ॒ष्टिं दि॒वः प॑वस्व री॒तिम॒पां जिन्वा॒ गवि॑ष्टये॒ धियः॑ ॥ (१०)
हे शोभन बल वाले सोम! तुम चमू नामक पात्रों पर निचुड़ कर एवं राजा के समान प्रजाओं के भारवहनकर्तता बनकर पधारो, अंतरिक्ष से जल की गति नीचे करो एवं गाय की अभिलाषा रखने वाले यजमान का यज्ञकर्म पूरा करो. (१०)
O Sobhan Bale Wale Mon! You come down to the characters named Chamu and become the weight-carrying force of the people like the king, bring down the speed of the water from space and complete the yajnakarma of the host who desires the cow. (10)