हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.108.2

मंडल 9 → सूक्त 108 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 108
यस्य॑ ते पी॒त्वा वृ॑ष॒भो वृ॑षा॒यते॒ऽस्य पी॒ता स्व॒र्विदः॑ । स सु॒प्रके॑तो अ॒भ्य॑क्रमी॒दिषोऽच्छा॒ वाजं॒ नैत॑शः ॥ (२)
हे सोम! अभिलाषापूरक इंद्र तुम्हें पीकर बैल के समान आचरण करते हैं. तुझ सर्वद्रष्टा सोम को पीकर इंद्र शोभनज्ञान वाले बनते हैं तथा शत्रुओं के अन्न पर उसी प्रकार आक्रमण करते हैं, जिस प्रकार घोड़ा युद्धस्थल की ओर जाता है. (२)
Hey Mon! The desireful Indra drinks you and behaves like a bull. By drinking your all-seer Som, Indra becomes a behobhnagyana and attacks the food of the enemies in the same way as the horse goes towards the battlefield. (2)