ऋग्वेद (मंडल 9)
जर॑तीभि॒रोष॑धीभिः प॒र्णेभिः॑ शकु॒नाना॑म् । का॒र्मा॒रो अश्म॑भि॒र्द्युभि॒र्हिर॑ण्यवन्तमिच्छ॒तीन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (२)
पुरानी लकड़ियों एवं पक्षियों के पंखों को शिलाओं द्वारा घिसकर बाण बनाए जाते हैं. कारीगर बाण बेचने के लिए धनी लोगों को खोजते हैं. हे सोम! तुम इंद्र के लिए अपना रस नीचे गिराओ. (२)
The wings of old wood and birds are worn by the rocks to form arrows. Artisans search for wealthy people to sell arrows. Hey Mon! You drop your juice down to Indra. (2)