हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.113.1

मंडल 9 → सूक्त 113 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 113
श॒र्य॒णाव॑ति॒ सोम॒मिन्द्रः॑ पिबतु वृत्र॒हा । बलं॒ दधा॑न आ॒त्मनि॑ करि॒ष्यन्वी॒र्यं॑ म॒हदिन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (१)
शत्रुनाशक इंद्र शर्यणावत नामक तालाब में सोम को पिएं एवं आत्मविश्वासी व महान्‌ शक्तिशाली बनें. हे सोम! तुम इंद्र के लिए रस टपकाओ. (१)
Drink Som in a pond called the enemy destroyer Indra Sharyanavat and become confident and great powerful. Hey Mon! You drip juice to Indra. (1)