हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 114
य इन्दोः॒ पव॑मान॒स्यानु॒ धामा॒न्यक्र॑मीत् । तमा॑हुः सुप्र॒जा इति॒ यस्ते॑ सो॒मावि॑ध॒न्मन॒ इन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (१)
शुद्ध होते हुए सोम के तेज का जो ब्राह्मण अनुगमन करता है, लोग उसे शोभन प्रजा वाला कहते हैं. जो अपना मन सोम के अनुकूल बना लेता है, उसे भी भाग्यशाली कहते हैं. हे सोम! तुम इंद्र के लिए रस टपकाओ. (१)
The Brahmin who follows the glory of Som while being clean, people call him Shobhan Praja Wala. The one who makes his mind friendly to Som is also called lucky. Hey Mon! You drip juice to Indra. (1)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 114
ऋषे॑ मन्त्र॒कृतां॒ स्तोमैः॒ कश्य॑पोद्व॒र्धय॒न्गिरः॑ । सोमं॑ नमस्य॒ राजा॑नं॒ यो ज॒ज्ञे वी॒रुधां॒ पति॒रिन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (२)
हे कश्यप ऋषि! मंत्ररचना करने वालों की स्तुतियों के आधार पर अपने वचनों को बढ़ाते हुए राजा सोम को नमस्कार करो. सोम वनस्पतियों के पालक के रूप में उत्पन्न हुए हैं. हे सोम! तुम इंद्र के लिए टपको. (२)
O Sage Kashyapa! Greet King Som by extending your words on the basis of praises of the chanters. Mon vegetas are originated as spinach. Hey Mon! You tap for Indra. (2)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 114
स॒प्त दिशो॒ नाना॑सूर्याः स॒प्त होता॑र ऋ॒त्विजः॑ । दे॒वा आ॑दि॒त्या ये स॒प्त तेभिः॑ सोमा॒भि र॑क्ष न॒ इन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (३)
हे सोम! ये जो सात दिशाएं सूर्य का आश्रय हैं, होम करने वाले जो सात ऋत्विज्‌ हैं तथा आदित्य आदि जो सात सूर्य हैं, उनके साथ मिलकर हमारी रक्षा करो. हे सोम! इंद्र के लिए रस टपकाओ. (३)
Hey Mon! These seven directions are the refuge of the sun, protect us together with the home-doers who are the seven ritwijs and Aditya, etc., who are the seven suns. Hey Mon! Drip the juice to Indra. (3)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 114
यत्ते॑ राजञ्छृ॒तं ह॒विस्तेन॑ सोमा॒भि र॑क्ष नः । अ॒रा॒ती॒वा मा न॑स्तारी॒न्मो च॑ नः॒ किं च॒नाम॑म॒दिन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (४)
हे राजा सोम! तुम्हारे लिए जो हवि पकाया गया है, उससे हमारी रक्षा करो. शत्रु हमारा वध न करे एवं हमारा धन आदि कुछ भी नष्ट न करें. तुम इंद्र के लिए रस टपकाओ. (४)
O King Mon! Protect us from what has been cooked for you. Let the enemy not kill us and do not destroy anything like our wealth. You drip juice to Indra. (4)