हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
सोमा॑ असृग्र॒मिन्द॑वः सु॒ता ऋ॒तस्य॒ साद॑ने । इन्द्रा॑य॒ मधु॑मत्तमाः ॥ (१)
निचुड़े हुए एवं अतिशय मधुर सोम यज्ञशाला में इंद्र के लिए निर्मित किए जाते हैं. (१)
The unruly and very sweet som is built for Indra in the yajnashala. (1)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
अ॒भि विप्रा॑ अनूषत॒ गावो॑ व॒त्सं न मा॒तरः॑ । इन्द्रं॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (२)
गाएं जिस प्रकार दूध पीने के लिए बछड़ों को बुलाती हैं, उसी प्रकार मेधावी यजमान सोम पीने के लिए इंद्र को बुलाते हैं. (२)
Just as the cows call the calves to drink milk, the talented host calls Indra to drink soma. (2)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
म॒द॒च्युत्क्षे॑ति॒ साद॑ने॒ सिन्धो॑रू॒र्मा वि॑प॒श्चित् । सोमो॑ गौ॒री अधि॑ श्रि॒तः ॥ (३)
नशीला रस टपकाने वाले तथा विद्वान्‌ सोम नदी की तरंगों एवं मध्यमा वाणी में स्थान पाते हैं. (३)
The intoxicating juice drippings and scholars find a place in the waves and medium voice of the River Som. (3)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
दि॒वो नाभा॑ विचक्ष॒णोऽव्यो॒ वारे॑ महीयते । सोमो॒ यः सु॒क्रतुः॑ क॒विः ॥ (४)
शोभन-बुद्धि वाले, कवि एवं विशेष द्रष्टा सोम अंतरिक्ष की नाभि के समान मेष के बालों पर पूजित होते हैं. (४)
Soma, a poet and a special seer, is worshipped on the hair of Aries like the navel of space. (4)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
यः सोमः॑ क॒लशे॒ष्वाँ अ॒न्तः प॒वित्र॒ आहि॑तः । तमिन्दुः॒ परि॑ षस्वजे ॥ (५)
कलशों एवं दशापवित्र नामक पात्र में रखे सोमरस की किरणों में सोमदेव प्रवेश करते हैं. (५)
Somdev enters the rays of somras kept in the kalash and a vessel called Dashapavitra. (5)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
प्र वाच॒मिन्दु॑रिष्यति समु॒द्रस्याधि॑ वि॒ष्टपि॑ । जिन्व॒न्कोशं॑ मधु॒श्चुत॑म् ॥ (६)
सोम जल बरसाने वाले मेघ को प्रसन्न करते हुए अंतरिक्ष के दृढ़ स्थल में शब्द करते हैं. (६)
Som speaks the words in the firm place of space, pleasing the water-pouring cloud. (6)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
नित्य॑स्तोत्रो॒ वन॒स्पति॑र्धी॒नाम॒न्तः स॑ब॒र्दुघः॑ । हि॒न्वा॒नो मानु॑षा यु॒गा ॥ (७)
नित्य स्तुति किए जाते हुए एवं अमृत दुहने वाले सोम नामक वनस्पति मनुष्यों के एक एक दिन को प्रसन्न करते हुए यज्ञों में निवास करते हैं. (७)
The vegetation called Soma, who is praised regularly and milks nectar, resides in the yagyas, pleasing each day of humans. (7)

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
अ॒भि प्रि॒या दि॒वस्प॒दा सोमो॑ हिन्वा॒नो अ॑र्षति । विप्र॑स्य॒ धार॑या क॒विः ॥ (८)
कवि सोम अंतरिक्ष से प्रेरित होकर मेधावियों द्वारा निर्मित धारा के रूप में अपने प्रिय स्थान को प्राप्त करते हैं. (८)
Poet Mon, inspired by the space, attains his beloved place as a stream created by the meritorious. (8)
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