ऋग्वेद (मंडल 9)
अति॒ त्री सो॑म रोच॒ना रोह॒न्न भ्रा॑जसे॒ दिव॑म् । इ॒ष्णन्सूर्यं॒ न चो॑दयः ॥ (५)
हे सोम! तुम तीनों लोकों का अतिक्रमण करके द्युलोक को प्रकाशित करते हो. तुम गतिशील होकर सूर्य को प्रेरित करो. (५)
Hey Mon! You transcend the three realms and publish the dulok. You move the sun by moving. (5)