हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.2.1

मंडल 9 → सूक्त 2 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 2
पव॑स्व देव॒वीरति॑ प॒वित्रं॑ सोम॒ रंह्या॑ । इन्द्र॑मिन्दो॒ वृषा वि॑श ॥ (१)
हे सोम! तुम देवाभिलाषी बनकर वेग से निचुड़ो तथा पवित्र बनो. हे अभिलाषापूरक सोम! तुम इंद्र में प्रवेश करो. (१)
Hey Mon! You must become a godly person, walk away swiftly and become holy. He is a wishy Mon! You enter Indra. (1)