हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.24.7

मंडल 9 → सूक्त 24 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 24
शुचिः॑ पाव॒क उ॑च्यते॒ सोमः॑ सु॒तस्य॒ मध्वः॑ । दे॒वा॒वीर॑घशंस॒हा ॥ (७)
मादक सोमलता का निचुड़ा हुआ रस शुद्ध एवं दूसरों को पवित्र करने वाला कहलाता है. वह देवों को तृप्त करने वाला एवं असुरहंता है. (७)
The unsettled juice of intoxicating somalatha is said to purify and sanctify others. He is the one who satisfies the gods and is the asura. (7)