हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.30.2

मंडल 9 → सूक्त 30 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 30
इन्दु॑र्हिया॒नः सो॒तृभि॑र्मृ॒ज्यमा॑नः॒ कनि॑क्रदत् । इय॑र्ति व॒ग्नुमि॑न्द्रि॒यम् ॥ (२)
ऋत्विजों द्वारा दशापवित्र पर शुद्ध किए जाते हुए दीप्तिशाली सोम शब्द करते हैं तथा इंद्रसंबंधी ध्वनि करते हैं. (२)
The radiant som words are made pure on the dashapavittra by the ritvijas and make the indrarshi sound. (2)