हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.38.1

मंडल 9 → सूक्त 38 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
ए॒ष उ॒ स्य वृषा॒ रथोऽव्यो॒ वारे॑भिरर्षति । गच्छ॒न्वाजं॑ सह॒स्रिण॑म् ॥ (१)
अभिलाषापूरक सोम रथ के समान गतिशील होकर यजमान को हजारों अन्न देने के लिए भेड़ के बालों से बने दशापवित्र को पार करके कलश में जाते हैं. (१)
The wish-fulfilling Som moves like a chariot and crosses the Dashapavitra made of sheep's hair to give thousands of food to the host and goes to the kalash. (1)