हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.38.3

मंडल 9 → सूक्त 38 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
ए॒तं त्यं ह॒रितो॒ दश॑ मर्मृ॒ज्यन्ते॑ अप॒स्युवः॑ । याभि॒र्मदा॑य॒ शुम्भ॑ते ॥ (३)
पकड़ने के स्वभाव वाली दस उंगलियां कर्म की इच्छुक बनकर सोम को निचोड़ रही हैं. इन उंगलियों द्वारा सोम इंद्र के नशे के लिए शुद्ध किए जाते हैं. (३)
The ten fingers with the nature of holding are squeezing Mon by becoming willing to act. These fingers are purified by Mon Indra for intoxication. (3)