हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.40.2

मंडल 9 → सूक्त 40 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 40
आ योनि॑मरु॒णो रु॑ह॒द्गम॒दिन्द्रं॒ वृषा॑ सु॒तः । ध्रु॒वे सद॑सि सीदति ॥ (२)
लाल रंग वाले सोम द्रोणकलश में जा रहे हैं. इसके बाद अभिलाषापूरक एवं निचुड़े हुए सोम इंद्र के समीप जाते हैं एवं निश्चित स्थान पर बैठते हैं. (२)
The red colored mons are going to Dronakalash. After this, the wishful and the relaxed Som goes near Indra and sits in a certain place. (2)