हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.42.2

मंडल 9 → सूक्त 42 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 42
ए॒ष प्र॒त्नेन॒ मन्म॑ना दे॒वो दे॒वेभ्य॒स्परि॑ । धार॑या पवते सु॒तः ॥ (२)
प्राचीन स्तोत्र के साथ निचुड़ते हुए ये सोम अपनी धारा से देवों के लिए सब ओर से गिरते हैं. (२)
While settling with ancient hymns, these somas fall from all sides to the gods from their stream. (2)