हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.43.3

मंडल 9 → सूक्त 43 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
पु॒ना॒नो या॑ति हर्य॒तः सोमो॑ गी॒र्भिः परि॑ष्कृतः । विप्र॑स्य॒ मेध्या॑तिथेः ॥ (३)
निचुड़ते हुए सुंदर सोम स्तुतियों से सुशोभित होकर मुझ मेधावी मेध्यातिथि के कल्याण के लिए द्रोणकलश में जाते हैं. (३)
Adorned with the beautiful Som hymns, they go to Dronakalash for the welfare of my meritorious merit. (3)