हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.46.2

मंडल 9 → सूक्त 46 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 46
परि॑ष्कृतास॒ इन्द॑वो॒ योषे॑व॒ पित्र्या॑वती । वा॒युं सोमा॑ असृक्षत ॥ (२)
जैसे पिता वाली कन्या अलंकृत होकर वर के पास जाती है, उसी प्रकार निचोड़े जाते हुए सोम वायु को प्राप्त होते हैं. (२)
Just as the daughter of the father goes to the groom ornately, so the soma, being squeezed, is attained to the air. (2)