हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.52.1

मंडल 9 → सूक्त 52 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 52
परि॑ द्यु॒क्षः स॒नद्र॑यि॒र्भर॒द्वाजं॑ नो॒ अन्ध॑सा । सु॒वा॒नो अ॑र्ष प॒वित्र॒ आ ॥ (१)
दीप्तिशाली एवं धन देने वाले सोम अन्न के साथ हमारे बल को बढ़ावें. हे सोम! तुम निचुड़ कर दशापवित्र पर गिरो. (१)
Increase our strength with the bright and wealthy Mon Anna. Hey Mon! You fall on the dashapavittra. (1)