ऋग्वेद (मंडल 9)
अ॒या नि॑ज॒घ्निरोज॑सा रथसं॒गे धने॑ हि॒ते । स्तवा॒ अबि॑भ्युषा हृ॒दा ॥ (२)
हे अपने बल से शत्रुओं को मारने वाले सोम! मैं भयरहित हृदय से इसलिए तुम्हारी स्तुति करता हूं कि तुम मेरे रथों में शत्रुओं का धन रखो. (२)
O Mon who kills enemies with your own force! I praise you with a fearless heart so that you put the wealth of your enemies in my chariots. (2)