हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.53.2

मंडल 9 → सूक्त 53 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 53
अ॒या नि॑ज॒घ्निरोज॑सा रथसं॒गे धने॑ हि॒ते । स्तवा॒ अबि॑भ्युषा हृ॒दा ॥ (२)
हे अपने बल से शत्रुओं को मारने वाले सोम! मैं भयरहित हृदय से इसलिए तुम्हारी स्तुति करता हूं कि तुम मेरे रथों में शत्रुओं का धन रखो. (२)
O Mon who kills enemies with your own force! I praise you with a fearless heart so that you put the wealth of your enemies in my chariots. (2)