हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.53.4

मंडल 9 → सूक्त 53 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 53
तं हि॑न्वन्ति मद॒च्युतं॒ हरिं॑ न॒दीषु॑ वा॒जिन॑म् । इन्दु॒मिन्द्रा॑य मत्स॒रम् ॥ (४)
ऋत्विज्‌ नशीला रस टपकाने वाले, हरितवर्ण, शक्तिशाली एवं मादक सोम को इंद्र के लिए जल में डालते हैं. (४)
The ritwijas put the juice dripping, greenish, powerful and intoxicating som in water for Indra. (4)