ऋग्वेद (मंडल 9)
यो जि॒नाति॒ न जीय॑ते॒ हन्ति॒ शत्रु॑म॒भीत्य॑ । स प॑वस्व सहस्रजित् ॥ (४)
हे असंख्य शत्रुओं को जीतने वाले सोम! तुम शत्रुओं को मारते हो, शन्रु तुम्हें नहीं मार सकते. तुम टपको. (४)
O Mon conquering the innumerable enemies! You kill enemies, you can't kill you. You tap. (4)