हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.57.4

मंडल 9 → सूक्त 57 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 57
स नो॒ विश्वा॑ दि॒वो वसू॒तो पृ॑थि॒व्या अधि॑ । पु॒ना॒न इ॑न्द॒वा भ॑र ॥ (४)
हे निचुड़ते हुए सोम! तुम स्वर्ग एवं पृथ्वी पर स्थित सारी संपत्तियां हमारे लिए लाओ. (४)
O swollen Mon! You bring us all the possessions in heaven and on earth. (4)