हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.60.2

मंडल 9 → सूक्त 60 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 60
तं त्वा॑ स॒हस्र॑चक्षस॒मथो॑ स॒हस्र॑भर्णसम् । अति॒ वार॑मपाविषुः ॥ (२)
हे हजारों द्वारा दृश्यमान, हजारों का भरण करने वाले एवं निचुड़ते हुए सोम! ऋत्विज्‌ तुम्हें भेड़ के बालों से बने दशापवित्र की सहायता से शुद्ध करते हैं. (२)
O Mon visible by the thousands, the one who fills the thousands and the unscrewing mon! The ritwij cleanses you with the help of dashapavitra made of sheep's hair. (2)