ऋग्वेद (मंडल 9)
अ॒भि गव्या॑नि वी॒तये॑ नृ॒म्णा पु॑ना॒नो अ॑र्षसि । स॒नद्वा॑जः॒ परि॑ स्रव ॥ (२३)
हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम भक्षण योग्य बनने के लिए गायों के दूध आदि से मिलते हो. तुम हमें अन्न देते हुए टपको. (२३)
O you are pure, Mon! You meet the milk of cows etc. to become eatable. You give us food. (23)