हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.62.23

मंडल 9 → सूक्त 62 → श्लोक 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 62
अ॒भि गव्या॑नि वी॒तये॑ नृ॒म्णा पु॑ना॒नो अ॑र्षसि । स॒नद्वा॑जः॒ परि॑ स्रव ॥ (२३)
हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम भक्षण योग्य बनने के लिए गायों के दूध आदि से मिलते हो. तुम हमें अन्न देते हुए टपको. (२३)
O you are pure, Mon! You meet the milk of cows etc. to become eatable. You give us food. (23)