हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.62.5

मंडल 9 → सूक्त 62 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 62
शु॒भ्रमन्धो॑ दे॒ववा॑तम॒प्सु धू॒तो नृभिः॑ सु॒तः । स्वद॑न्ति॒ गावः॒ पयो॑भिः ॥ (५)
गाएं अपने दूध के द्वारा देवों के प्रार्थित सोमरूप शोभन अन्न को स्वादिष्ट बनाती हैं. ऋत्विजों द्वारा निचोड़े गए सोम जल के द्वारा शुद्ध होते हैं. (५)
Sings make the somarup shobhan food tasty for the gods through their milk. The mons squeezed by the ritwijas are purified by water. (5)