ऋग्वेद (मंडल 9)
वृषा॑ सोम द्यु॒माँ अ॑सि॒ वृषा॑ देव॒ वृष॑व्रतः । वृषा॒ धर्मा॑णि दधिषे ॥ (१)
हे सोम! तुम अभिलाषापूरक एवं दीप्तिशाली हो. हे दीप्तिशाली एवं अभिलाषापूरक सोम! तुम देवों और मानवों के उपयोगी कर्मो को धारण करते हो. (१)
Hey Mon! You are full of desire and bright. O glorious and wishful Mon! You possess the useful deeds of gods and human beings. (1)
ऋग्वेद (मंडल 9)
वृष्ण॑स्ते॒ वृष्ण्यं॒ शवो॒ वृषा॒ वनं॒ वृषा॒ मदः॑ । स॒त्यं वृ॑ष॒न्वृषेद॑सि ॥ (२)
हे अभिलाषापूरक सोम! तुम्हारा बल, तुम्हारी सेवा एवं तुम्हारा मद अभिलाषापूरक है. तुम वास्तव में अभिलाषापूरक हो. (२)
He is a wishy Mon! Your strength, your service and your item are full of desire. You're truly full of desires. (2)
ऋग्वेद (मंडल 9)
अश्वो॒ न च॑क्रदो॒ वृषा॒ सं गा इ॑न्दो॒ समर्व॑तः । वि नो॑ रा॒ये दुरो॑ वृधि ॥ (३)
हे अभिलाषापूरक सोम! तुम घोड़े के समान हिनहिनाते हो. तुम हमें गाएं एवं घोड़े दो और हमारे लिए धन के द्वार खोलो. (३)
He is a wishy Mon! You're like a horse. "You sing to us and give us horses, and open the doors of wealth for us." (3)
ऋग्वेद (मंडल 9)
असृ॑क्षत॒ प्र वा॒जिनो॑ ग॒व्या सोमा॑सो अश्व॒या । शु॒क्रासो॑ वीर॒याशवः॑ ॥ (४)
ऋत्विजों ने शक्तिशाली, उज्ज्वल एवं वेगशाली सोम का निर्माण गायों, घोड़ों और संतान को पाने की अभिलाषा से किया है. (४)
The ritwijas have built the mighty, bright and fast som with the desire to get cows, horses and offspring. (4)
ऋग्वेद (मंडल 9)
शु॒म्भमा॑ना ऋता॒युभि॑र्मृ॒ज्यमा॑ना॒ गभ॑स्त्योः । पव॑न्ते॒ वारे॑ अ॒व्यये॑ ॥ (५)
यज्ञाभिलाषी यजमानों द्वारा अलंकृत एवं दोनों हाथों से मसले जाते हुए सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर छनते हैं. (५)
The yajnabhilagis, embellished by hosts and mashed with both hands, are snagged on the dashapavitra made of som sheep's hair. (5)
ऋग्वेद (मंडल 9)
ते विश्वा॑ दा॒शुषे॒ वसु॒ सोमा॑ दि॒व्यानि॒ पार्थि॑वा । पव॑न्ता॒मान्तरि॑क्ष्या ॥ (६)
वे सोम हव्य देने वाले यजमान के लिए द्युलोक, धरती एवं अंतरिक्ष में उत्पन्न सभी धन बरसावें. (६)
They should shower all the wealth generated in dulok, earth and space for the host who gives the som havya. (6)
ऋग्वेद (मंडल 9)
पव॑मानस्य विश्ववि॒त्प्र ते॒ सर्गा॑ असृक्षत । सूर्य॑स्येव॒ न र॒श्मयः॑ ॥ (७)
हे सबको देखने वाले एवं छनते हुए सोम! तुम्हारी बनती हुई धारें इस समय सूर्य किरणों के समान चमकती हुई निर्मित होती हैं. (७)
O all the seers and seers, Mon! The edges you make are made at this time shining like the sun rays. (7)
ऋग्वेद (मंडल 9)
के॒तुं कृ॒ण्वन्दि॒वस्परि॒ विश्वा॑ रू॒पाभ्य॑र्षसि । स॒मु॒द्रः सो॑म पिन्वसे ॥ (८)
हे रस भरे हुए सोम! तुम हमारी पहचान करते हुए हमारे लिए सभी रूप अंतरिक्ष से बरसाओ एवं हमें भांति-भांति का धन दो. (८)
O juicy Mon! You identify us, and shower us of all forms from space and give us all kinds of wealth. (8)