हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.66.15

मंडल 9 → सूक्त 66 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
आ प॑वस्व॒ गवि॑ष्टये म॒हे सो॑म नृ॒चक्ष॑से । एन्द्र॑स्य ज॒ठरे॑ विश ॥ (१५)
हे सोम! तुम अंगिरागोत्रीय ऋषियों की गाएं खोजने वाले, महान्‌ तथा मानवों का कर्मफल देखने वाले इंद्र के लिए शुद्ध बनो एवं इंद्र के उदर में प्रवेश करो. (१५)
Hey Mon! Be pure to Indra, who seeks the sings of the Angiragotrian sages, the great and the one who sees the karma of the human beings, and enter the belly of Indra. (15)